वॉशिंगटन पोस्ट में भारी छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान की भी हुई नौकरी जाने

नई दिल्ली

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में से एक 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने अपने कर्मचारियों को एक बड़ा झटका दिया है. अखबार ने अपने कुल स्टाफ के लगभग एक-तिहाई (300 से अधिक कर्मचारियों) की छंटनी कर दी है.इस बड़ी छंटनी की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और अखबार के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय स्तंभकार ईशान थरूर भी आए हैं.

उन्होंने अखबार में बिताए अपने वर्षों की सेवा और अचानक समाप्त हुए अपने कार्यकाल पर भावुक प्रतिक्रिया दी और इसे यह न्यूज़रूम और वैश्विक पत्रकारिता के लिए 'बेहद दुखद दिन' बताया.

उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा,“आज अंतरराष्ट्रीय स्टाफ के अधिकांश साथियों और कई अन्य शानदार सहकर्मियों के साथ मुझे वॉशिंगटन पोस्ट से ले-ऑफ कर दिया गया है. हमारा न्यूज़रूम और खासकर वे बेहतरीन पत्रकार, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोस्ट की सेवा की उनके लिए दिल से बहुत दुखी हूं.” एक अलग पोस्ट में उन्होंने खाली न्यूज़रूम की तस्वीर साझा करते हुए इसे बस “एक बुरा दिन” बताया.

ये भी पढ़ें :  टूट सकते हैं, मगर झुकेंगे नहीं! पीएम मोदी की डायरी में अटल जी की अमर पंक्तियाँ

ईशान ने अख़बार में अपने काम को याद करते हुए कहा कि 2017 में ‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम की शुरुआत करना उनके लिए सम्मान की बात थी जिसका मकसद पाठकों को वैश्विक मामलों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना था. उन्होंने उन लगभग पांच लाख सब्सक्राइबर्स का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने वर्षों तक उनकी रिपोर्टिंग को पढ़ा और सराहा.

वॉशिंगटन पोस्ट ने बड़ी संख्या में छंटनियों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है. अखबार ने अपने स्पोर्ट्स सेक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया है. इसके साथ ही कई विदेशी ब्यूरो और बुक कवरेज सेक्शन पर भी ताला लग गया है. सबसे चौंकाने वाला फैसला मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की पूरी रिपोर्टिंग टीम और संपादकों को हटाना रहा.

ये भी पढ़ें :  कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी: शशि थरूर फिर अहम बैठक से नदारद, वजह पर उठे सवाल

पूर्व संपादकों ने की आलोचना
अखबार के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस कदम को "खुद ब्रांड का खात्मा करना" करार दिया है. वहीं वर्तमान प्रबंधन का कहना है कि बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के अनुसार खुद को ढालने के लिए यह "दर्दनाक लेकिन जरूरी" फैसला था.

काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर और युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने वाली लिजी जॉनसन जैसी दिग्गज पत्रकारों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. वहीं पत्रकारिता के शिक्षाविदों और पूर्व कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि ये कटौतियां दुनिया के सबसे प्रभावशाली न्यूजरूम्स में से एक को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती हैं.

काहिरा ब्यूरो प्रमुख क्लेयर पार्कर ने एक्स पर बताया कि उन्हें अख़बार की पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम के साथ नौकरी से निकाल दिया गया है. उन्होंने इस फैसले को “समझ से परे” बताया. वहीं लिजी जॉनसन जिन्होंने हाल ही में युद्ध क्षेत्र जैसी परिस्थितियों में यूक्रेन से रिपोर्टिंग की थी ने भी पुष्टि की कि उन्हें भी नौकरी से हटा दिया गया है.

ये भी पढ़ें :  सांसद कंगना का बयान वायरल: मंडी में आई आपदा को बताया 'भारी-भरकम' भूकंप, सोशल मीडिया पर ट्रोल

पूरे पत्रकारिता जगत में इस फैसले को लेकर गुस्सा और हैरानी देखने को मिली. द अटलांटिक में लिखे एक लेख में वॉशिंगटन पोस्ट की पूर्व पत्रकार ऐश्ले पार्कर ने चेतावनी दी कि लगभग 150 वर्षों से अमेरिकी लोकतंत्र का स्तंभ रहे इस अखबार की मौजूदा दिशा उसकी विरासत को गंभीर खतरे में डाल रही है.

एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने इस फैसले को “दर्दनाक लेकिन ज़रूरी” बताया. उन्होंने स्टाफ से कहा कि बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के अनुसार ढलने के लिए संगठन हर किसी के लिए सब कुछ नहीं बन सकता. कंपनी की बैठक के बाद कर्मचारियों को ईमेल के जरिए उनके भविष्य के बारे में बताया गया. 
 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment